Guide(1965) Movie Review :- Dev Anand, Waheeda Rehman, S. D. Burman, Vijay Anand and R. K. Narayan.


गाँव के मंदिर में राजू गाइड साधू के वेश में अपने आसपास लोगो की भीड़ जुटाए कई दिनों से भूखा-प्यासा बैठा है, इस भीड़ में ना सिर्फ गांव के गरीब लोग है बल्कि देश-विदेश से आये बड़े बड़े पत्रकार और मीडिया के लोग भी शामिल है,

इन सभी लोगो का यह विश्वास है की उसके ऐसा करने से गाँव की सुखी धरती पर पानी बरसने लगेगा,
लेकिन एक बात जो कोई नही जानता कि राजू कोई साधू-महात्मा नहीं बल्कि चोरी के इल्जाम में जेल की हवा खा चुका एक कैदी है,

आमतौर पर हम इस तरह की घटना को महज एक अंधविस्वास, मीडिया गिमिक या फिर ऐसा ही कुछ समझेंगे… राइट ?


नमस्ते दोस्तों,

चलिए शुरू करते हैं हिंदी सिनेमा की महानतम कृति  Guide(1965) के Movie Review से,

गाइड की कहानी आधारित है चलते-पुर्जे राजू (देव आनंद) पर,पेशे से गाइड राजू के घर उसकी बूढी विधवा माँ हैं, छोटे शहर के उस रेल-स्टेशन पर उसकी एक दुकान है, दुकान क्या आप उसे एक अड्डा बोल सकते हैं जहाँ वह शहर घूमने आये लोगो को अपनी भोली सूरत और चिकनी चोपड़ी बातो में फसाता और फिर पुरानी इमारते घुमाकर उनके नए करारे नोट अपनी जेब में रखकर चलते बनता,

एक दिन उसी स्टेशन पर राजू की मुलाकात होती है बेहद खूबसूरत रोजी (वहीदा रहमान) से जो अपने पति के साथ राजू का शहर घुमने आती है और फिर वाही होता है जो अक्सर इश्क में होता है, राजू पूरी लाइफ अपसाइड-डाउन जाती है.

रोजी एक बहुत अच्छी डांसर है, कला की रूह उसकी आजादी है रोजी के लिए भी उसका डांस ही उसका पैशन था, 

वह चाहती थी की दुनिया के तमाम बन्धनों को तोड़कर वह बस नाचती रहे और लोग उसे सराहे, रोजी के प्यार में पागल राजू अपना सब कुछ खो कर भी उसके सपने को साकार कर देता है लेकिन कहते है जब किसी के प्यार पर हक़ समझ लिया जाता है तो प्यार उड़ने वाली चिड़िया बनाकर फुर्र से उड़ जाता हैं, ठीक ऐसा ही राजू और रोजीके बीच में भी होता हैं.

अब दोनों साथ रहकर भी साथ नही है, अब उनके बीच का प्यार कही गायब सा होते जाता है, राजू इस  गम बर्दाश्त नही कर पाता और अपने आप को शराब के नशे डूबो देता है।

फिर राजू की एक छोटी सी गलती ताबूत में आखिरी कील का काम करती है औऱ गलत फहमी की वजह से रोजी राजू को चोर समझ बैठती हैं पर और राजू की दो साल की जेल हो जाती है.
कुछ दिनों बाद रोजी को अपनी गलती का अहसास जरूर होता है और वह राजू से मिलने जेल भी जाती है लेकिन अब तक दोनों के बीच सब कुछ खत्म हो चुका होता है, राजू रोजी को आपना अतीत मानकर भूल चुका हूं, रोजी मायूस होकर अपनी दुनिया मे लौट जाती हैं।

फिल्म की असली कहानी यही से शुरू होती है, जेल से निकलने के बाद राजू अपनी पुरानी जिंदगी से अलग एक नयी शुरुआत करना चाहता है और इसीलिए वह एक अंजान गाँव पहुच जाता हैं जहाँ उसे कोई नहीं जनता है.

फिल्म की कहानी आगे बढती है और फिर कैसे उस अंजान गाँव के लोग एक गलतफहमी की वजह से उसे कोई बड़ा साधू-महात्मा समझने लगते है और फिर कैसे वही चलता-पुर्जा राजू एक दिन उन्ही गांववालों की मदद के लिए उपवास करता है, क्या उसकी तपस्या से प्रसन्न होकर इंद्रदेवता उस गाँव की सुखी धरती पर बरसात करते या नहीं..इसके लिए तो आपको फिल्म ही देखनी पड़ेगी.

हो सकता हैं कि गाइड देखते देखते आप भी अपने आप को उसी भीड़ में खडा पाओ और उन लोगो की तरह आपका मन भी आपसे पूछने लगे कि पानी बरसेगा या नही… धीरे धीरे आप भी शामिल हो जाओ उसी उन्माद उसी आनंद में जहाँ यह तय कर पाना मुश्किल हो जाये कि क्या गलत है और क्या सही, दिमाग विश्वास और अंधविश्वास के बीच फर्क ही न कर पाने के लायक बचे तो फिर इस बात से क्या ही फर्क पड़ता है की सही में पानी बरसे या नही बरसे !!!

NaSukh

दिलो दिमाग को हिलाकर रख देने वाली और हमारे अंतर्मन की परते खोलती “गाइड” अपने समय से कहीं आगे बने एक बहुत ही बेहतरीन फिल्म हैं, हिन्दी सिनेमा के इतिहास ऐसी फिल्मे कभी कभार ही बनती हैं.

फिल्म की कहानी लिखी थी मालगुडी-डेज वाले आर. के. नारायण ने ,म्यूजिक सचिन देव बर्मन का था और दसो के दस गाने सुपर-डुपर हिट थे, देव साहब की एक्टिंग और वहीदा रहमान का डांस के लिए यक़ीनन आप फिल्म कई बार देख डालोगे.

फिल्म के डायरेक्टर देव आनद के छोटे भाई विजय-आनंद ने किया था जिनको अपनी Neo-noir फिल्मो के लिए जाना जाता हैं, विजय आनंद उर्फ गोल्डी ने हिंदी सिनेमा को गाइड के अलावा भी कई और बेहतरीन फिल्मे जैसे की “ज्वेलथीफ” और “जोनी मेरा नाम” दी हैं.

जाते जाते बस इतना कहना चाहूंगा कि कुछ फिल्मे बनायीं नहीं जाती बस बन जाती है, ये फिल्मे अपने समय से कही आगे और आने वाली नस्लों के लिए एक मील का पत्थर साबित होती है.

दोस्तों, समय मिले तो गाइड जरुर देखें.

थैंक्यू.